सिर्फ तुम

 मेरी रूह की पहली तलब हो तुम..

कैसे कहूँ मैं सबसे अलग हो तुम..

मेरे मुस्कुराने की वजह हो तुम..
जिस पर चलूं मैं आंखे बंद करके,
मेरा वो खूबसूरत सफर हो तुम..

इस जिंदगी के सफर में...
सब खो कर जिसको मैं पाना चाहूं...
जिसके आगे मेरा हर रिश्ता फीका है
मेरी मंजिल.....मेरी जिंदगी के वही शख्स हो तुम..!!

रोशनी शुक्ला


टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें